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आखिर कहाँ गया लंका का सारा सोना | जानिए वास्तविक सच...

Dec 23 2018

Posted By:  Sandeep

भारतीय इतिहास में भगवान श्री राम की अनेक गाथाये सुनने को मिलती है | ऐसा कहा जाता है की जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंकापति रावण का अंत किया था तो उन्होंने लंका का शासन भार रावण के छोटे भाई विभीषण को दे दिया था | जिसके काफी समय बाद तक विभीषण के वंशजो ने लंका पर राज किया था | यह लंका सोने की बनी हुई थी | लेकिन आज यह खंडर के रूप में है | इस लंका का सारा सोना कहाँ गया | आज हम आपको अपने इस आर्टिकल से बताने जा रहे है |


कुछ लोगो का मानना है की रावण को यह सोने की लंका भगवान शंकर से वरदान के रूप में प्राप्त हुई थी | जबकी कुछ लोगो का कहना है की राजस्थान के अलवर जिले में रावण को एक पत्थर मिला था | जिसे पारस पत्थर कहा जाता है | इसके द्वारा रावण ने अपने छोटे से राज्य को सोने में बदल दिया था | जो कालांतर में लंका कहलाई | कुछ धर्मगुरु मानते है की यह लंका बलपूर्वक कुबेर से रावण ने छीनी थी | जिसका निर्माण स्वयं विश्वकर्मा ने किया था |

रामायण से लंका की भौगोलिक स्थिति के बारे में पता चलता है | लेकिन सवाल यह उठता है की सोने से बनी लंका आखिर कहाँ गयी | उसका सारा सोना कहाँ चला गया | हम बता दें की लंका आज पूरी तरह उजड़ चुकी है | इसमें सोना तो दूर लोहे के टुकड़े भी बड़ी मुश्किल से प्राप्त होते है | 

कुछ इतिहासकारो का लंका के बारे में मत है की समय बीतने के साथ-साथ लंका का सारा सोना हिन्द महासागर में डूब गया | जबकी कुछ लोगो का मानना है की विदेशी आक्रांताओ ने यहाँ का सारा सोना लूट लिया था | लेकिन श्री लंका के इतिहासकारो ने इसका वर्णन नहीं किया है | इसके बारे में सिर्फ इतना ही कहा गया है की 1872 में एक जहाज लंका से ब्रिटेन ले जाया जा रहा था | जिसमे काफी सोना था | लेकिन प्रॉपुलर की खराबी की वजह से वह समुद्र के बीचो-बीच अटक गया | 



उस समय के जहाज के कप्तान ने समझदारी दिखाते हुये | जहाज को छोड़कर श्री लंका वापस लोट गये | 1905 में इस ब्रिटिश सरकार द्वारा एक कमेटी बैठाई गयी | जिसमे फैसला किया गया की जहाज को तलाशा जायेगा | इस टीम के एक सदस्य हेनरी राफेल ने  अपनी पुस्तक "माय जर्नी ऑफ़ इंडिया" में दावा किया था कि, शुरुआत में तलाशी अभियान का मैं भी एक सदस्य था |

यहाँ हमने देखा की काफी सोना प्राप्त हुआ है | लेकिन जब इसकी जांच की गयी तो पता चला की यह सोना वह नहीं है जो 1872 में गुम हुआ था | यह तो कोई और ही सोना है | जब जांच बारीकी से की गयी तो पता चला की यह सोना काफी प्राचीन है | शायद भारत और श्री लंका का कोई पुराना सोना रहा होगा | लेकिन इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने जांच अचानक से रोक दी | उस समय मुझे पता नहीं चला की सरकार ने ऐसा क्यों किया | लेकिन जब मेरा ट्रांसफर साउथ अफ्रीका किया गया तो मुझे सब कुछ समझ में आ गया | ब्रिटिश सरकार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये उन लोगो को हटाना चाहती थी, जो उस जांच से जुड़े हुये थे |


ऐसा कहा जाता है की यहाँ से लगभग 185 जहाजों से सोना ब्रिटेन ले जाया गया | यह वही सोना रहा होगा, जो लंका नगरी के साथ समुद्र में डूब गया था | लेकिन सबसे आश्चर्य की बात यह है की भारत के किसी भी इतिहासकार ने इसका स्पष्ट वर्णन नहीं किया है | जिससे यह दावे के साथ कहना की, सारा सोना ब्रिटेन चला गया था थोड़ा गलत होगा | क्योंकि यदि ऐसा होता तो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन की शक्ति कमजोर नहीं होती | 
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